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मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

ब...ब...बिहार

हाल में ही बिहार गया था। पिछली बार जब अपने घर की यात्रा की थी, तो सड़कों को बनते देखा था। उनपर चलने का आनंद नहीं उठा पाया। इस बीच बिहार के विकास पर लम्बी बहस चली... पटना की इस यात्रा की शुरुआत नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से हुई। मगध में बैठा। ट्रेन अपने समय से चली, लेकिन पटना 8 घंटे लेट पहुंची। भला हो, रास्ते में रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी भी इस ट्रेन में चढ़ गए। चेन पुलिंग नहीं हुई इसके कारण। पटना पहुचने के बाद मगध इस्लामपुर नहीं गयी। जब पटना में था तो रेलवे बीट कवर करने वाले रिपोर्टर के पास रोजाना मगध के लेट होने और तक़रीबन हर रोज इस्लामपुर नहीं जाने की खबर होती थी। तब लालू रेल मंत्री थे, आज ममता दीदी हैं। पर मगध की किस्मत नहीं बदली। अगले दिन अहले सुबह इंजिनीयरिंग कॉलेज ग्राउंड पहुंचा। लड़के वही कर रहे थे, जो करीब दस साल पहले पढने पटना पहुंचे हमारी तरह के लड़के करते थे। क्रिकेट के बहाने तारी गटकना। कहते हैं सूर्योदय से पहले तारी पीना सेहत के लिए अच्छा है। अपनी सेहत नहीं बनी...कुछ ही दिन में तारी और इंजिनीयरिंग कॉलेज ग्राउंड जाने का नशा उतर गया। उम्मीद हैं इन लड़कों के साथ भी ऐसा ही हो। सुकून इस बात कि ऐसा करने वाले अधिकतर लड़के नए-नए ही पटना पहुंचे हैं। इसलिए उम्मीद कायम है। इसके बाद उस कॉलेज की यात्रा की जहां दो साल पढ़ा हूँ। नजारा सुकून देने वाला था. छात्र नजर आ रहे थे. आते तो हमारे भी ज़माने में भी थे, लेकिन पढाई का बुरा हाल था. लड़कियां कभी-कभार ही नजर आती थी. जब दिखती थी तो लगता था उत्सवी माहौल है। अक्सर इनके दर्शन के लिए हम विमेंस कॉलेज के गेट के बाहर घंटो खड़े रहते थे. लेकिन, इस बार स्कूटी पर उडान भरती लड़कियों को जब अपने ही कॉलेज में देखा तो दिल में टीस उभर गई. काश, दस साल बाद पैदा होता...
(बिहार यात्रा की कथा जारी है ...)

गुरुवार, 2 दिसंबर 2010

अहाँ हमर के छी

अहाँ हमर के छी ......२
स्वप्नक रानी प्रेम दिवानी
कोयल छी अछि पंचम वाणी
अहाँ हमर ............... ।
नयन अहाँ केर प्यासल प्यासल
काजरि सँ अछि सुन्दर साजल
डूबि कs देखि अथाह समुन्दर
अधलाह जँ ने मानी
अहाँ हमर ............. ।
ठोढक लाली मय केर प्याली
सोरहो बसंतक छी हरियाली
चंद्रमुख ई चमक रहल अछि
चमकय जेना चानी
अहाँ हमर ............ ।
धवल अंग पर कारी साडी
प्रेमक भौँरा अंग निहारी
अंगक रस हम पीबि रहल छी
आँख करय मनमानी
अहाँ हमर ............. ।
प्रणय गीत हम गाबि कहय छी
ह्रदय मे बस अहिं रहय छी
एक भs जाय दिय दुनु केर
बात हमर जँ मानी
अहाँ हमर .......... ।
(गीतकार लल्लन प्रसाद ठाकुर के ब्लॉग स साभार)