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गुरुवार, 14 अक्तूबर 2010

मगर शर्म इन्हें आती नहीं

आज राजनीति के मैदान से दो बड़ी ख़बरें आई हैं। कर्नाटक के नाटक पर फ़िलहाल विराम लग गया है। भाजपा की सरकार ने चार दिनों के भीतर दूसरी बार विश्वास म़त हासिल किया। दूसरी ओर, महराष्ट्र में कांग्रेस का खेल बेनकाब हुआ है। कैसे, सोनिया की रैलियों में भीड़ जुटाई जाती है वह कैमरे पर आ चुका है।
बात पहले कर्नाटक की। भाजपा को इतने वोट मिले हैं कि यदि निर्दलियों को वोट डालने का अधिकार कोर्ट दे भी दे तो सरकार बची रहेगी। अब इस पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया देखिए। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि ये सरकार बाहुबल और पैसे के ताक़त पर बचाई गई है। सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया है। यदि इस बात मे दम है भी तो कांग्रेस राज्य सरकार को गिराने के लिए इतनी बेचैन क्यूँ हैं, समझ में नहीं आ रहा? कल तक इसी पार्टी का कहना था कि भाजपा के पास बहुमत लायक विधायक ही नहीं हैं। जो चमत्कार पैसे और बाहुबल से पार्टी पिछले सात दिनों में नहीं कर पाई, उसे आखिर अंतिम चौबीस घंटे में कैसे कर दिया गया। वैसे भी बंगलुरू में बैठकर हंसराज भारद्वाज संविधान का भला करने के बदले कांग्रेस का ही तो एजेंडा चलाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। इतना ही नहीं इस नाटक के शुरू होने से पहले रेड्डी बंधुओं के पीछे लगी कांग्रेस अचानक ही उनको लेकर मौन हो गई। मैं रेड्डी बंधुओं का बचाव नहीं कर रहा। उन्हें सजा मिलनी चाहिए, कानून सम्मत। लेकिन, नफा-नुकसान का आकलन कर रेड्डी बंधुओं से कभी प्यार और कभी दुत्कार कांग्रेस का असली पोलीटिकल चेहरा दिखाता है। वैसे भी कर्नाटक में जैसा चल रहा है ऐसा ही चलता रहा तो भाजपा की कब्र ही खुदनी बाकी रह गई है. जल्दबाजी दिखा कर कांग्रेस और कुमारस्वामी उसे संजीवनी ही दे रहे हैं.
अब बात महाराष्ट्र की. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री ने वर्धा में सोनिया की होने वाली रैली को लेकर कुछ खुलासा किया है.किसी चैनेल ने स्टिंग ऑपरेशन नहीं किया। गलती से इनकी बाते कैमरे में कैद हो गई। दरअसल पार्टी का प्रेस कांफ्रेंस हो रहा था। दोनों नेताओं को पता नहीं था की कैमरा ऑन है। अब जरा इनकी बात सुनिए...अशोक चौहान(मुख्यमंत्री) ने दो हजार बसों के लिए दो करोड़ दे दिए हैं... इन बसों में लोगों को भरकर लाना है... आखिर गलती से ही सही यह सार्वजनिक हो ही गया कि मैडम सोनिया और और युवराज राहुल की रैलियों में भीड़ कैसे जुटती है। अब तो लगता है कि राहुल की यात्राओं के दौरान होने वाली नौटंकिया भी कही फिक्स ही तो नहीं होती।
वैसे भी अपने देश में कुछ भी हो सकता है। आखिर पता भी तो नहीं चलता कि नत्था मरेगा या बचेगा. लाल बहादुर मिलने के बावजूद। अब अपने कलमाडी साहब को ही देखिए। जनाब भी गलती से कांग्रेसी ही हैं। कॉमनवेल्थ खेल के आयोजन समिति के अध्यक्ष भी हैं। आज इस खेल का समापन हो रहा है। समिति की तरफ से अख़बारों में एड दिया गया है। भगवान भरोसे सफल हुए आयोजन से लेकर खिलाडियों के स्वर्णिम प्रदर्शन तक का श्रेय समिति ने लूट लिया है। वैसे भी कलमाडी से नैतिक साहस की कभी भी उम्मीद नहीं रही है। भाई साहब खुद लाल बहादुर जो हैं! सिर्फ इसी बात की ख़ुशी है कि समिति ने सयाना से लेकर सुशील तक हर किसी को कोचिंग देने का श्रेय नहीं लिया। बच गए पुलेला गोपीचंद से लेकर सतपाल तक। एक और मजेदार बात कांग्रेसी प्रधानमंत्री हॉकी देखने पहुंचे और ऑस्ट्रेलिया ने भारत को धो डाला। हा हा हा...गनीमत है नेहवाल का मैच देखना मनमोहन भूल गए. फ़िलहाल रैंकिंग में नंबर दो रहने का जश्न मनाइए, हमारे राजनेता तो ऐसे ही हैं.

1 टिप्पणी:

  1. भाजपा और कांग्रेस दरअसल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और वैसे भी यह राजनीति है मित्र। मैकियावेली के मुताबिक सफल राजनेता की चमड़ी गैंडे की, दिमाग लोमड़ी का और दिल सियार का होना चाहिए। हां, जहां तक रैलियों वाली आपकी बात है, तो यह एक खुला सत्य है, इन दो की गलती से आज वह सार्वजनिक हो गया। वैसे भी मेरी नजर में तो भाजपा अधिक गालियों की हकदार है, क्योंकि उसने विश्वासघात किया है और यह निकृष्टतम अपराध है....तो दिल पर नहीं लें। वैसे, आपका विश्लेषण और तार्किकता देश के प्रति आपके प्यार को ही दिखाती है। इसके लिए बधाई.........

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